Sacchi Ghost Story: Call Center Se Ghar Jaate Waqt Chudail Ka Saamna
सुनिए...
क्या कभी ऐसा हुआ
है कि आप देर
रात ड्यूटी खत्म करके घर
लौट रहे हों, और
आपका सामना किसी ऐसी अनदेखी,
खौफनाक ताकत से हो
जाए जो आपको घर
पहुंचाने के बजाय सीधे
मौत के मुंह में
धकेल दे?
सांसें
थाम लीजिए, क्योंकि आज मैं आपको
जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ,
वो किसी का काल्पनिक
दिमाग की उपज नहीं
है। यह रूह कंपा
देने वाला सच मुंबई
के रहने वाले अरमान
के साथ घटित हुआ
था। बात साल 2012 की
है। अरमान ने हाल ही
में अपना बी.कॉम
पूरा किया था और
एक अच्छी नौकरी की तलाश में
भटक रहा था। जब
काफी कोशिशों के बाद भी
कोई ढंग का काम
नहीं मिला, तो उसने सोचा
कि क्यों न तब तक
अपनी पॉकेट मनी निकालने के
लिए किसी कॉल सेंटर
में काम कर लिया
जाए।
आप में से बहुत
से लोग जानते होंगे
कि कॉल सेंटर की
नौकरियां शिफ्टों में चलती हैं—कभी मॉर्निंग, कभी
इवनिंग, तो कभी लेट
नाइट। अरमान को वहां काम
करते हुए करीब एक
महीना बीत चुका था।
और अब, पहली बार
उसकी नाइट शिफ्ट लगने
वाली थी।
अरमान
बताते हैं कि नाइट
शिफ्ट की टाइमिंग शाम
6 बजे से लेकर रात
2 बजे तक की थी।
उस वक्त कॉल का
फ्लो बहुत कम होता
था, इसलिए फर्श पर मुट्ठी
भर चुनिंदा लोग ही नाइट
ड्यूटी पर रोके जाते
थे। अरमान को अंदाज़ा भी
नहीं था कि उसकी
जिंदगी की यह पहली
नाइट शिफ्ट, उस नौकरी का
आखिरी दिन बनने वाली
थी। उस रात उसके
साथ एक के बाद
एक ऐसे भयानक और
रूह कँपा देने वाले
हादसे हुए, जिन्हें सुनकर
आज भी लोगों का
खून जम जाता है।
आखिर क्या हुआ था
उस काली रात को?
चलिए, इस खौफनाक दास्तान
को गहराई से महसूस करते
हैं।
मुंबई
के अंधेरी इलाके में मरोल और
साकीनाका जैसी जगहें कॉल
सेंटर्स का हब मानी
जाती हैं। जहाँ हर
साल हजारों फ्रेशर अपनी पॉकेट मनी
के लिए रात-रात
भर जागकर काम करते हैं।
अरमान की नाइट ड्यूटी
शुरू होने से ठीक
एक दिन पहले, जब
उसका 'रोस्टर' (ड्यूटी चार्ट) सामने आया, तो उसे
देखकर अरमान के दिल के
किसी कोने में एक
अजीब सा अनजाना डर
बैठ गया।
उसे
परेशान देखकर उसके टीम लीडर
(TL) ने कंधे पर हाथ
रखा और कहा, "अरमान, डरने
वाली कोई बात नहीं है। पहली बार नाइट शिफ्ट में थोड़ी घबराहट होती है, इट्स नॉर्मल। लेकिन... एक बात गांठ बांध लो। रात के 12 बजे के बाद इस ऑफिस बिल्डिंग में अकेले कभी ब्रेक पर मत निकलना, और ना ही अकेले वॉशरूम जाना। बस चुपचाप अपनी सीट पर रहना। और हां, जैसे ही रात के 2 बजे शिफ्ट खत्म हो, जो ऑफिस की शेयरिंग कैब मिलती है, सीधे उसमें बैठना और ड्राइवर तुम्हें घर ड्रॉप कर देगा।"
अरमान
ने चौंककर टीएल से पूछा,
"सर, 12
बजे के बाद अकेले वॉशरूम क्यों नहीं जाना? क्या बात है?"
टीएल
ने अपनी नजरें चुराते
हुए बात को टाला,
"अरे कुछ नहीं यार, बस तुम पहली बार नाइट ड्यूटी कर रहे हो न, इसलिए बोल रहा हूँ।" इतना कहकर टीएल
ने बात वहीं खत्म
कर दी, लेकिन अरमान
के मन में एक
गहरा सस्पेंस छोड़ दिया।
अगले
दिन, अरमान वक्त से पहले
ही शाम 6 बजे ऑफिस पहुंच
गया। रात के 11 बजे
तक सब कुछ बिल्कुल
नॉर्मल चल रहा था।
उस रात फ्लोर पर
अरमान को मिलाकर सिर्फ
12 एजेंट्स और 1 टीम लीडर
मौजूद थे। लोग कम
थे और काम ज्यादा,
इसलिए बैक-टू-बैक
कॉल्स आ रही थीं।
काम के इसी दबाव
में रात के कब
12 बज गए, किसी को
पता ही नहीं चला।
लगातार
कॉल्स अटेंड करने की वजह
से अरमान को तेज वॉशरूम
लगा था, लेकिन उसे
सीट छोड़ने का मौका नहीं
मिल रहा था। जैसे
ही एक लंबा कॉल
खत्म हुआ, वह राहत
की सांस लेते हुए
तेजी से वॉशरूम की
तरफ भागा। अंदर जाकर जैसे
ही वह फ्रेश हुआ
और हाथ धोने के
लिए वॉशबेसिन के पास आया,
उसकी नजर कलाई पर
बंधी घड़ी पर गई।
सुइयां
चीख-चीख कर बता
रही थीं—रात के 12 बजकर 7 मिनट हो चुके थे!
समय
देखते ही अरमान के
दिमाग में बिजली की
तरह टीएल की वो
बात कौंधी—'12 बजे के बाद अकेले वॉशरूम मत जाना।' बात याद आते
ही अरमान के शरीर का
तापमान जैसे गिर गया।
उसके माथे पर ठंडे
पसीने की बूंदें उभर
आईं। वह घबराहट में
जल्दी-जल्दी हाथ सुखाने लगा
कि तभी... उस सन्नाटे से
भरे वॉशरूम में एक बेहद
खौफनाक आवाज गूंजने लगी।
शूश...
आअाह... शूश...
वह किसी के बहुत
तेजी से और भारी
सांसें लेने की आवाज
थी। ऐसा लग रहा
था मानो कोई बहुत
थका हुआ, हाफता हुआ
साया ठीक अरमान के
पीछे खड़ा होकर गहरी
सांसें ले रहा हो।
अरमान ने थरथराते हुए
इधर-उधर नजरें दौड़ाईं,
लेकिन वहां कोई नहीं
था। हवा में अचानक
बर्फीली ठंडक छा गई।
तभी,
उसके ठीक सामने वाले
टॉयलेट का दरवाजा धीरे-धीरे अपने आप
हिलने लगा। वो हल्का
सा खुलता और बंद होता।
अरमान की नजरें उस
दरवाजे पर टिक गईं,
उसकी चीख गले में
ही फंस गई। और
फिर अचानक... वो दरवाजा पूरी
ताकत से खुला और
'धाड़' की भयानक आवाज
के साथ बंद हो
गया!
उस धमाके के साथ ही
पूरे वॉशरूम में किसी औरत
की ऐसी तीखी, हिस्टिरिकल
और शैतानी हंसी गूंज उठी
कि अरमान का कलेजा मुंह
को आ गया। खौफ
के मारे उसका दिमागी
संतुलन डगमगाने लगा। वह बदहवास
होकर बाहर की तरफ
भागने ही वाला था
कि तभी उसने देखा—वॉशरूम के फर्श से
उठकर एक गाढ़ा, मटमैला
सफेद धुआं (Smoke) हवा में तैरने
लगा है। और देखते
ही देखते, उस खौफनाक धुएं
के बीच एक डरावनी
औरत की धुंधली सी
आकृति उभरने लगी!
यह नजारा किसी के भी
होश उड़ाने के लिए काफी
था। अरमान की हालत बद
से बदतर हो चुकी
थी, डर के मारे
उसके रोंगटे खड़े थे, और
पैर मानो फर्श से
चिपक गए थे।
इधर
फ्लोर पर, अरमान को
ब्रेक पर गए 15 मिनट
से ज्यादा का वक्त हो
चुका था। नाइट टीएल
ने चारों तरफ नजर घुमाई
और पूछा, "अरे, अरमान कहाँ है?" तभी पास बैठे
एक लड़के ने कहा, "सर, वो
शायद वॉशरूम गया है।"
जैसे
ही टीएल ने 'वॉशरूम'
शब्द सुना, उसके चेहरे का
रंग उड़ गया। उसने
लगभग चिल्लाते हुए पूछा, "क्या? अकेले
गया है वो?"
टीएल
ने बिना एक पल
गंवाए अपने साथ दो
लड़कों को लिया और
दौड़ते हुए वॉशरूम की
तरफ भागा। जैसे ही वो
लोग वॉशरूम के पास पहुंचे,
नजारा देखकर उनके पैरों तले
जमीन खिसक गई। अरमान
वॉशरूम के मुख्य दरवाजे
के बाहर, फर्श पर बेसुध
और बेहोश पड़ा हुआ था।
उसके मुंह से झाग
निकल रहा था।
टीएल
और बाकी दोनों लड़कों
ने किसी तरह अरमान
को उठाया और खींचते हुए
सीधे ड्यूटी फ्लोर पर ले आए।
सबने उसके चेहरे पर
पानी के छीटें मारे,
उसे झकझोरा, तब जाकर कहीं
अरमान को होश आया।
लेकिन होश में आते
ही अरमान पागलों की तरह चीखने-चिल्लाने लगा और इधर-उधर भागने की
कोशिश करने लगा। उसका
पूरा शरीर कांप रहा
था।
टीएल
ने उसे मजबूती से
पकड़ा और शांत कराते
हुए कहा, "अरमान! शांत हो जाओ... कुछ नहीं हुआ है। शांत! मुझे पता है तुम्हारी पहली नाइट शिफ्ट है, तुम शायद किसी वहम का शिकार हो गए हो। रिलैक्स करो, जाकर आराम करो अब।"
टीएल
अंदर से सब समझ
चुका था कि अरमान
ने क्या देख लिया
है, लेकिन वो उस वक्त
आधी रात को बाकी
स्टाफ को डराकर फ्लोर
पर भगदड़ नहीं मचाना चाहता
था, इसलिए उसने बात दबा
दी। करीब 1 बजे तक अरमान
थोड़ा शांत हुआ और
पूरी तरह होश में
आया। उसे अच्छी तरह
मालूम था कि वो
रात के 1 बजे अकेले
ऑफिस से बाहर नहीं
निकल सकता, क्योंकि मुंबई की उस सुनसान
रात में ऑफिस की
कैब ही एकमात्र सहारा
थी, जो ठीक 2 बजे
मिलने वाली थी। उसने
किसी तरह कांपते हाथों
से अपनी ड्यूटी पूरी
की और 2 बजने का
इंतजार करने लगा।
जैसे
ही रात के 2 बजे
और शिफ्ट खत्म हुई, टीएल
अरमान के पास आया
और बेहद गंभीर आवाज
में बोला, "अरमान, यहाँ से सीधे अपने घर जाओ। रास्ते में कहीं मत रुकना और जो कुछ भी वॉशरूम में हुआ, उसे भूलने की कोशिश करो। और हाँ... मेरी एक सलाह मानो, कल सुबह ही किसी मौलवी या तांत्रिक के पास जाना और अपना झाड़-फूंक करवा लेना। बात को हल्के में मत लेना।"
पर मेरे दोस्तों... आपको
क्या लगता है? क्या
अरमान की खौफनाक दास्तान
यहीं खत्म हो गई?
नहीं।
जो खौफनाक मंजर उसने वॉशरूम
में देखा था, वो
तो बस एक मामूली
सी झांकी थी। असली तबाही,
रूह कंपा देने वाला
वो असली हादसा तो
आगे रास्ते में उसका इंतजार
कर रहा था—एक
ऐसा खौफनाक सामना, जिसकी वजह से अरमान
अगले एक हफ्ते तक
मौत और जिंदगी के
बीच अस्पताल के बेड पर
झूलता रहा, और उसने
कभी दोबारा किसी कॉल सेंटर
की दहलीज पर कदम नहीं
रखा।
रात
के करीब 2:10 बजे, ऑफिस के
सभी लोग शेयरिंग कैब
में बैठ गए। अरमान
चुपचाप ड्राइवर के बगल वाली
फ्रंट सीट पर बैठ
गया। उसका चेहरा बिल्कुल
पीला पड़ चुका था
और वो शून्य में
ताक रहा था। ड्राइवर
ने उसकी हालत देखी
और भांपते हुए पूछा, "क्यों भाई...
फर्स्ट नाइट ड्यूटी थी क्या?"
अरमान
ने बिना कुछ बोले
बस हां में सिर
हिला दिया। ड्राइवर ने एक ठंडी
सांस ली और थोड़ा
मजाक और रहस्यमयी लहजे
में पूछा, "12 बजे के बाद वॉशरूम की तरफ गए थे क्या? वो मिली क्या तुम्हें?"
जैसे
ही ड्राइवर ने यह कहा,
अरमान ने चौंककर उसकी
तरफ देखा। उसका दिल तेजी
से धड़कने लगा। अरमान के
मन में आया कि
इस ड्राइवर को कैसे पता
कि अंदर वॉशरूम में
क्या हुआ है? वहां
कौन था?
ड्राइवर
ने अरमान के चेहरे के
उड़ते रंग को देखकर
कहा, "मैं समझ गया बाबू, तुम गए थे। अगर वहां कुछ देखा है, तो उसे यहीं भूल जाओ। और जैसा तुम्हारे साहब ने कहा, कल सुबह पहला काम यही करना कि किसी मौलवी के पास जाकर झाड़-फूंक करा लेना। बस, उससे ज्यादा कुछ मत सोचना।"
बातें
करते-करते कैब अरमान
के गंतव्य यानी मेन रोड
पर आ पहुंची। ड्राइवर
ने गाड़ी रोकी और अरमान
को सड़क के किनारे
उतार दिया।
अब यहाँ से असली
इम्तिहान शुरू होना था।
अरमान का घर मुख्य
सड़क से अंदर की
तरफ स्थित एक पुरानी 'सरकारी
कॉलोनी' में था। सड़क
से उतरकर कॉलोनी के मुख्य गेट
से एंट्री करने के बाद,
कॉलोनी के अंदरूनी, संकरे
रास्तों से होते हुए
लगभग 1 किलोमीटर पैदल अंदर जाना
पड़ता था, तब जाकर
उसका घर आता था।
कैब अंदर नहीं जा
सकती थी क्योंकि गाड़ियों
की एंट्री कॉलोनी के पिछले गेट
से थी, जहाँ से
घूमकर जाने में 2 किलोमीटर
का लंबा चक्कर काटना
पड़ता और वहां से
अरमान का घर और
ज्यादा दूर हो जाता।
इसलिए, अरमान ने उसी सुनसान
मुख्य गेट से कॉलोनी
के अंदर कदम रख
दिया।
चलिए,
मैं आपको इस सरकारी
कॉलोनी के बारे में
थोड़ा और बता दूँ
ताकि आप वहां के
माहौल की विभीषिका को
महसूस कर सकें। यह
एक बेहद पुरानी सरकारी
कॉलोनी थी, जहाँ सरकारी
कर्मचारियों को क्वार्टर मिले
हुए थे। सारे क्वार्टर्स
दो मंजिला थे, जिनकी हालत
इतनी जर्जर और खंडहर जैसी
हो चुकी थी कि
दीवारों से सीमेंट झड़
रहा था। रास्तों के
दोनों तरफ ये बदसूरत
क्वार्टर्स बने थे और
उनके बीच में अनगिनत
पुराने, ऊंचे-ऊंचे पेड़
और झाड़ियां उगी हुई थीं।
उन पेड़ों को सालों से
काटा-छांटा नहीं गया था,
जिससे ऐसा लगता था
मानो किसी घने, डरावने
जंगल के बीच पुराने
खंडहर नुमा घर बना
दिए गए हों।
वहां
दिन के उजाले में
भी ऐसा सन्नाटा पसरा
रहता था कि इंसान
अकेले जाने से डरे,
तो आप अंदाजा लगा
सकते हैं कि रात
के ढाई-तीन बजे
वहां क्या आलम होता
होगा! वैसे भी, यह
कॉलोनी अपनी किसी अच्छाई
के लिए नहीं, बल्कि
अपने काले कारनामों, खुदकुशियों
और भूतिया घटनाओं के लिए पूरे
इलाके में बदनाम थी।
अरमान को भी इन
खौफनाक किस्सों में से कई
कहानियां पता थीं। पर
उसने सपने में भी
नहीं सोचा था कि
आज उन्हीं कहानियों में से कोई
एक खौफनाक हकीकत बनकर उसका रास्ता
रोके खड़ी होगी।
सन्नाटा
इतना गहरा था कि
अरमान को अपने जूतों
की आवाज भी किसी
धमाके की तरह सुनाई
दे रही थी। उसने
कांपते हाथों से जेब से
मोबाइल निकाला, उसकी टॉर्च ऑन
की और उस मद्धम
रोशनी के सहारे कॉलोनी
की काली सड़क पर
आगे बढ़ने लगा।
चलते-चलते अभी वो
मुश्किल से 200 मीटर ही आगे
बढ़ा होगा कि अचानक...
उसे हवा में अजीबोगरीब
सरसराहट और रोने-सिसकने
जैसी आवाजें सुनाई देने लगीं। अरमान
ने डर को दबाते
हुए टॉर्च घुमाई। तभी उसने देखा
कि रास्ते के किनारे लगी
एक पुरानी लकड़ी की बेंच पर
एक भारी-भरकम, बेहद
काले रंग का नाइजीरियाई
(Nigerian) शख्स एक पैर पर
दूसरा पैर रखे चुपचाप
बैठा हुआ है।
अरमान
ने मन ही मन
सोचा कि 'हे भगवान! रात के इस वक्त, करीब 2:50 बजे, इस सुनसान और डरावने रास्ते के बीचो-बीच यह आदमी यहाँ क्या कर रहा है?' लेकिन अगले ही पल,
गहरे डर के बीच
अरमान के मन को
थोड़ी तसल्ली भी हुई कि
चलो, कोई भी हो,
कम से कम कोई
इंसान तो बैठा है।
इस भूतिया सन्नाटे में किसी का
होना ही बड़ी बात
थी।
जैसे-जैसे अरमान उस
आदमी के नजदीक पहुंचा,
उसने देखा कि वो
बिल्कुल कोयले जैसा काला नाइजीरियाई
इंसान था। उसकी आंखें
बिना पलक झपकाए सिर्फ
और सिर्फ अरमान को घूर रही
थीं। अरमान के बदन में
एक सिहरन दौड़ गई, लेकिन
उसने बिना कोई रिएक्शन
दिए, अपनी नजरें नीची
कीं और तेजी से
उसके पास से आगे
निकल गया।
अब आधा रास्ता पार
हो चुका था। अरमान
ने राहत की सांस
ली और मन ही
मन कहा—'बस, जल्दी से घर पहुंचूं और सो जाऊं, बहुत तेज नींद आ रही है और दिमाग भी थक चुका है।'
तभी
अचानक... सन्नाटे को चीरती हुई
एक तेज आवाज गूंजी—
छम...
छम... छम...
वह किसी के पैरों
में बंधी भारी पायलों
की आवाज थी! ऐसा
लगा जैसे कोई औरत
पीछे से बहुत तेजी
से दौड़ती हुई उसकी तरफ
आ रही हो। इसके
साथ ही, एक बेहद
बर्फीली और ठंडी हवा
का झोंका अरमान के पूरे शरीर
से टकराया, मानो खून जमा
देने वाली ठंड ने
उसे छू लिया हो।
अरमान ने घबराकर तुरंत
पलटकर चारों तरफ टॉर्च की
रोशनी मारी... लेकिन पीछे दूर-दूर
तक कोई नहीं था।
सिर्फ सूनी सड़क और
पेड़ों के साए हिल
रहे थे।
अरमान
का दिल अब उसकी
छाती को चीरकर बाहर
आने को था। वह
अपनी रफ्तार बढ़ाकर आगे भागने ही
वाला था कि तभी
रास्ते के मोड़ पर
उसे वो दिखाई दी...
जिसके खौफनाक किस्से पूरी कॉलोनी में
मशहूर थे।
आगे
रास्ते पर नाले के
ऊपर एक छोटा सा
सीमेंट का पुल (पुलिया)
बना हुआ था। उस
पुलिया की मुंडेर पर...
एक औरत लाल चटक
साड़ी पहने पीठ करके
बैठी हुई थी। उसके
कंधे बुरी तरह हिल
रहे थे और वो
जोर-जोर से सिसक-सिसक कर रो
रही थी।
उहूँ...
उहूँ... आअाह...
उसका
रोना इतना दर्दनाक और
डरावना था कि अरमान
के पैर वहीं के
वहीं जाम हो गए।
उसके शरीर ने आगे
बढ़ने से साफ मना
कर दिया। अब अरमान को
समझ आ चुका था
कि आज उसका बचना
नामुमकिन है, आज उसका
खेल खत्म होने वाला
है। डर के मारे
उसका पूरा शरीर बर्फ
की तरह ठंडा पड़
चुका था। उसमें इतनी
हिम्मत नहीं बची थी
कि वो उस रास्ते
पर एक कदम भी
आगे बढ़ाए और उस लाल
साड़ी वाली औरत को
क्रॉस करके अपने घर
की तरफ जाए।
तभी...
वो लाल साड़ी वाली
औरत अचानक रोते-रोते अपनी
जगह पर उठ खड़ी
हुई। उसने धीरे-धीरे
अरमान की तरफ अपना
हाथ बढ़ाया... और एक ऐसी
आवाज में, जो सीधे
अरमान के दिमाग के
अंदर गूंजी, उसने कहा—
"अरमान...
क्या हुआ? रुक क्यों गए? आओ... मेरे पास आओ... आ जाओ अरमान..."
उस भयानक रात में, उस
सुनसान उजाड़ रास्ते पर, एक अनजान
और डरावनी रूह के मुंह
से अपना खुद का
नाम सुनकर अरमान के होश उड़
गए! उसकी हालत ऐसी
थी कि मानो उसका
दिल अभी धड़कना बंद
कर देगा और उसे
हार्ट अटैक आ जाएगा।
अरमान ने थरथराते हुए
अपने कदम पीछे की
तरफ बढ़ाने शुरू किए।
वो औरत मुड़ी और
हवा में तैरते हुए
उसकी तरफ बढ़ने लगी,
"ना अारमान ना... मुझे छोड़कर मत जाओ... मैं कब से... सिर्फ तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी..."
यह कहते हुए, उस
औरत ने अपने चेहरे
से लाल साड़ी का
वो लंबा घूंघट धीरे
से हटाया...।
बाप
रे बाप! जैसे ही घूंघट
हटा, अरमान की चीख निकल
गई। उसने जिंदगी का
सबसे खौफनाक मंजर देख लिया
था। उस औरत का
चेहरा पूरी तरह से
काली आग में झुलसा
हुआ था! मांस की
चमड़ी पिघलकर लटक रही थी,
आँखों की जगह सिर्फ
दो जलते हुए गड्ढे
थे। और सबसे भयानक...
उसके चेहरे से अभी भी
मांस के जलने की
भयंकर बदबू आ रही
थी और धुआं उठ
रहा था! उसके लंबे,
काले बाल हवा में
किसी नागिन की तरह लहरा
रहे थे।
यह देखते ही अरमान ने
बिना एक पल गंवाए,
अपनी पूरी ताकत समेटी
और पीछे मुख्य सड़क
की तरफ उल्टे पैर
जान बचाकर दौड़ लगा दी!
वह अपनी जान हथेली
पर रखकर इतनी तेजी
से भागा कि हवा
भी पीछे छूट जाए।
वह पीछे मुड़-मुड़कर
देख रहा था कि
वो चुड़ैल उसके कितने पास
आई है, और इसी
अफरा-तफरी में... वह
सामने से आ रहे
किसी इंसान से बहुत प्रचंड
ताकत से टकरा गया!
टक्कर
इतनी जोरदार थी कि अरमान
हवा में उछलकर दूर
जा गिरा। उसके हाथ से
मोबाइल छूटकर घने अंधेरे में
कहीं जा गिरा और
टॉर्च बंद हो गई।
अरमान ने दर्द से
कराहते हुए ऊपर देखा
कि आखिर वो किससे
टकराया है... तो सामने वही
भारी-भरकम नाइजीरियाई शख्स
खड़ा था! वह वहां
खड़ा होकर अरमान की
बेबसी पर पागलों की
तरह अट्टहास कर रहा था,
जोर-जोर से हंस
रहा था।
और देखते ही देखते, वो
नाइजीरियाई आदमी हंसते-हंसते
हवा में गायब हो
गया!
यह जादू और खौफ
देखकर अरमान का दिमाग सुन्न
हो गया। वह बिना
कुछ सोचे-समझे फिर
से उठकर भागने ही
वाला था कि अचानक...
अरमान के पैर जमीन
छोड़ गए! उसका शरीर
हवा में उठने लगा।
वो लाल साड़ी वाली
झुलसी हुई चुड़ैल पलक
झपकते ही वहां पहुंच
चुकी थी। उसने अपनी
अदृश्य, ताकतवर शक्ति से अरमान को
हवा में उठा लिया
और सड़क के किनारे
ले जाकर पत्थरों पर
पटक दिया।
वह उड़ती हुई अरमान के
बिल्कुल करीब आई, उसका
झुलसा हुआ बदबूदार चेहरा
अरमान के चेहरे से
महज़ कुछ इंच की
दूरी पर था। उसने
अपनी खूनी आंखों से
अरमान को देखा और
कहा, "अरमान... चलो मेरे साथ! मैं तुम्हें अपने साथ ले जाने आई हूँ..."
इतना
कहकर उस डायन ने
अपने दोनों काले, झुलसे हुए हाथों से
अरमान का गला दबोच
लिया और उसे सीधे
हवा में उठा दिया!
उसकी सांसें पूरी तरह रुक
चुकी थीं। वो चुड़ैल
डरावनी हंसी हंसते हुए
बोली, "मैं एक-एक कर... इस कॉलोनी के सब लोगों को यहाँ से अपने साथ ले जाऊँगी... कोई नहीं बचेगा!"
और फिर, उसने एक
भयानक झटके के साथ
अरमान को रास्ते के
किनारे बने उस गहरे
नाले में फेंक दिया,
जिसमें घुटनों तक सड़ता हुआ
गंदा पानी और कीचड़
भरा था।
नाला
पत्थरों से घिरा था।
अरमान का सिर और
हाथ उन पत्थरों से
बुरी तरह टकराए। उसकी
हड्डियों के चटकने की
आवाज आई। असहनीय दर्द
और दम घुटने की
वजह से अब अरमान
की आंखों के आगे अंधेरा
छाने लगा था। उसे
लगने लगा था कि
ये उसकी जिंदगी के
आखिरी पल हैं, वो
अब नहीं बचेगा। वह
बेहोश होने ही वाला
था कि तभी... अचानक
दूर से एक तेज
'सायरन' की आवाज अरमान
के कानों में पड़ी।
उस सायरन की आवाज को
सुनकर अरमान ने मरती हुई
हिम्मत को बटोरा। वह
किसी तरह कीचड़ से
लथपथ, लहूलुहान हालत में नाले
से बाहर रेंगते हुए
निकला और सीधे कॉलोनी
की मुख्य सड़क के बीचो-बीच आकर गिर
पड़ा।
तभी
एक तेज, चौंधिया देने
वाली हेडलाइट की रोशनी सीधे
उसके चेहरे पर पड़ी। अरमान
ने अपनी धुंधली होती
आंखों से देखा—सामने
एक एम्बुलेंस खड़ी थी। दरअसल,
वो एम्बुलेंस देर रात कॉलोनी
में किसी मरीज की
डेड बॉडी (शव) को ड्रॉप
करके वापस अस्पताल की
तरफ लौट रही थी।
एम्बुलेंस
के ड्राइवर और हेल्पर ने
सड़क के बीचो-बीच
लहूलुहान हालत में पड़े
अरमान को देखा। वे
तुरंत गाड़ी रोककर उसकी तरफ दौड़े।
अरमान की हालत नाजुक
थी, उसका शरीर ठंडा
पड़ रहा था। उन्होंने
बिना वक्त गंवाए उसे
उठाया और एम्बुलेंस के
स्ट्रेचर पर लिटाकर सीधे
अस्पताल की तरफ गाड़ी
दौड़ा दी।
रास्ते
में हेल्पर ने अरमान की
जान बचाने और उसकी पहचान
करने के लिए उसका
बैग चेक किया। उसमें
उसकी ऑफिस की आईडी
(ID Card) मिल गई, जिस पर
अरमान का नाम और
एक इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर लिखा था—जो कि उसके
पिता का था। हेल्पर
ने तुरंत उसके परिवार को
सूचना दी।
अरमान
को विले पार्ले के
कूपर हॉस्पिटल (Cooper Hospital) में भर्ती कराया
गया, जहाँ वह करीब
एक हफ्ते तक जिंदगी और
मौत की जंग लड़ता
रहा। उसके शरीर पर
अनगिनत गहरे जख्म और
खरोंचें थीं, और उसका
एक हाथ कई जगहों
से फ्रैक्चर हो चुका था।
अगले
दिन जब अरमान को
होश आया, तो आईसीयू
के बेड पर अपने
सामने माता-पिता को
खड़ा देखकर वह बच्चा बन
गया और फफक-फफक
कर, फूट-फूट कर
रोने लगा। उसने रोते
हुए उस काली रात
की पूरी दास्तान अपनी
मां और बाबूजी को
कह सुनाई। उसने बताया कि
कैसे उस पुरानी कॉलोनी
की लाल साड़ी वाली
डायन उसकी जान लेने
पर उतारू थी और कैसे
उसने उसे हवा में
टांग दिया था।
अस्पताल
से डिस्चार्ज होकर अरमान घर
तो आ गया, लेकिन
यह खौफनाक हादसा उसे जिंदगी भर
का ऐसा सबक दे
गया जिसे वो कभी
नहीं भूल सकता।
अरमान
बताते हैं कि उस
रात कॉलोनी में जिन दो
रूहानी ताकतों से उनका सामना
हुआ था, उनमें से
उस लाल साड़ी वाली
चुड़ैल के बारे में
तो वो पहले से
जानते थे, लेकिन उस
नाइजीरियाई शख्स की खौफनाक
हकीकत उन्हें इस घटना के
बहुत बाद में पता
चली।
दरअसल,
वो नाइजीरियाई व्यक्ति कोई भूत नहीं,
बल्कि सालों पहले एक ड्रग
स्मगलर हुआ करता था।
करीब 10 साल पहले, पैसों
के लेनदेन के विवाद में
कुछ स्थानीय गुंडों ने मिलकर बड़ी
बेरहमी से उसका मर्डर
कर दिया था और
उसकी लाश को उसी
कॉलोनी के एक सुनसान
कोने में फेंक दिया
था। तब से, उसकी
रूह भटक रही है
और हर रात 2 से
4 बजे के बीच वो
उसी लकड़ी की बेंच पर
बैठा कई लोगों को
दिखाई देता है। हालांकि,
वो किसी को नुकसान
नहीं पहुंचाता। लेकिन कॉलोनी के लोग बताते
हैं कि वो नाइजीरियाई
साया उस लाल साड़ी
वाली चुड़ैल से बहुत डरता
है; जैसे ही वो
डायन वहां आती है,
ये नाइजीरियाई डरकर गायब हो
जाता है।
रही
बात उस लाल साड़ी
वाली खौफनाक डायन की... तो
अरमान बताते हैं कि करीब
15 साल पहले उस कॉलोनी
के एक क्वार्टर में
एक पति-पत्नी और
उनकी बूढ़ी मां रहते थे।
उस घर में आए
दिन किसी न किसी
बात को लेकर भयंकर
घरेलू झगड़े होते थे। ऐसे
ही एक खौफनाक दिन,
रात के करीब 11 बजे,
पति और सास से
प्रताड़ित होकर उस औरत
ने गुस्से और अवसाद में
आकर अपने ऊपर मिट्टी
का तेल (केरोसिन) छिड़क
लिया और आग लगा
ली। वह उसी रास्ते
पर तड़प-तड़प कर
जलकर मर गई थी।
तब से उसकी रूह
एक बेहद खतरनाक और
हिंसक पिशाचिनी बन चुकी है,
जो रात के अंधेरे
में वहां से गुजरने
वाले इंसानों को बहकाकर, डराकर
या नुकसान पहुंचाकर उनकी जान ले
लेती है।
इस रूह कंपा देने
वाले हादसे के करीब 6 महीने
बाद, अरमान ने उस खौफ
से थोड़ा उबरकर एक सीधे-साधे
अकाउंटेंट की नौकरी जॉइन
कर ली। लेकिन हां...
कहानी का असली सस्पेंस
तो अब शुरू होता
है।
अस्पताल
के चक्करों, पुलिस केस और अपनी
शारीरिक रिकवरी की हड़बड़ाहट में
अरमान और उसके परिवार
से एक बहुत बड़ी,
भयानक गलती हो गई
थी। एक ऐसी बेहद
जरूरी बात अरमान के
दिमाग से पूरी तरह
मिस (Miss) हो गई थी,
जिसका अंदाजा उसे ठीक एक
साल बाद जाकर हुआ।
और जब वो सच
सामने आया, तो अरमान
के पैरों के नीचे की
जमीन ही खिसक गई!
क्या
आप जानते हैं कि अरमान
से कौन सी बड़ी
चीज मिस हो गई
थी? क्योंकि कहानी सुनते हुए आपको भी
लग रहा होगा ना
कि कुछ अधूरा छूट
गया है?
जी हां, आप बिल्कुल
सही सोच रहे हैं!
वो खौफनाक घटना जो कॉल
सेंटर की ड्यूटी के
दौरान 'वॉशरूम' में घटी थी...
जिसके बाद टीएल ने
साफ-साफ कहा था
कि सुबह जाकर किसी
मौलवी से इसकी झाड़-फूंक करा लेना...
अरमान उस बात को
करवाना बिल्कुल भूल गया था!
उसने सिर्फ कॉलोनी वाले हादसे का
इलाज करवाया, लेकिन उस ऑफिस के
वॉशरूम वाली बला तो
अभी भी उसके पीछे
थी।
और उस एक लापरवाही
की वजह से, ठीक
एक साल बाद अरमान
की जिंदगी में जो नया
बवंडर आया, उसकी एक
अलग ही दिल दहला
देने वाली दास्तान है।
वह कॉल सेंटर का
क्या मैटर था? वो
वॉशरूम में दिखने वाली
औरत कौन थी, और
उसने अरमान का क्या हश्र
किया?
अगर आप उस रूह कंपा देने वाले 'पार्ट-2' को भी सुनना चाहते हैं, तो मुझे अभी कमेंट करके बताइए, मैं बहुत जल्द अरमान की जिंदगी का वो दूसरा सबसे काला अध्याय भी आपके सामने खोलूंगा...।
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